शेयर बाजार में बड़ा क्रैश: सेंसेक्स 1045 अंक टूटा, निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंचा
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को एक बार फिर भारी बिकवाली का माहौल देखने को मिला। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,045.46 अंक गिरकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी-50 इंडेक्स भी 371.25 अंक की गिरावट के साथ 22,231.80 के स्तर पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान निफ्टी फिसलकर 22,179.90 के स्तर तक चला गया था, जो इसका नया 52-वीक लो (52 हफ्तों का निचला स्तर) है। बाजार में आए इस अचानक भूचाल की वजह से निवेशकों के लगभग 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
कैसा रहा दिनभर का हाल?
बाजार बंद होने तक बीएसई के 30 प्रमुख शेयरों में से सिर्फ इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एक्सिस बैंक ही बढ़त के साथ (हरे निशान में) टिक पाए। दूसरी तरफ, ITC के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह एक विदेशी निवेशक द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचना रही। इसके अलावा बजाज के दोनों शेयर और अदाणी पोर्ट्स भी शुरुआती दबाव के बाद बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।
व्यापक बाजार (Broad Market) की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2% तक की कमजोरी रही। सेक्टर के लिहाज से निफ्टी मेटल लगभग 3% टूटकर सबसे ज्यादा नुकसान में रहा, जबकि रियल्टी और ऑयल & गैस इंडेक्स में 2% तक की गिरावट आई। एनएसई (NSE) पर 2,645 शेयर लाल निशान (गिरावट) में बंद हुए, जबकि महज 693 शेयरों में बढ़त देखने को मिली।
बाजार में इस बड़ी गिरावट के 4 मुख्य कारण
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RBI का सख्त रुख और रेपो रेट में बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर अपनाया गया सख्त रुख बाजार की गिरावट की बड़ी वजह बना। आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है और अपना रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर लिया है। ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा, जिससे उनकी भविष्य की कमाई और निवेश योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
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लगातार FII Selling (विदेशी निवेशकों की बिकवाली)
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में विदेशी फंड्स द्वारा हिस्सेदारी बेचने से सेंटीमेंट और बिगड़ा है।
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रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर अपने ऑल-टाइम लो (रिकॉर्ड निचले स्तर) के करीब पहुंच गया है। कमजोर रुपये से उन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है जो कच्चे माल का आयात करती हैं, जिससे कॉर्पोरेट प्रॉफिट पर असर पड़ता है।
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India VIX (वोलेटिलिटी इंडेक्स) में उछाल
बाजार में उथल-पुथल को दर्शाने वाला ‘इंडिया विक्स’ 2% से ज्यादा चढ़ गया। VIX में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और घबराहट बढ़ रही है।
आगे के लिए क्या है बाजार का रुख?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सतर्कता बनी रहेगी। आरबीआई के सख्त कदमों के बाद अब निवेशकों की नजरें बैंकिंग, फाइनेंस और रेट-सेंसिटिव (ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले) शेयरों पर टिकी रहेंगी। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों के संकेत और रुपये की चाल यह तय करेगी कि बाजार में रिकवरी कब देखने को मिलती है।
