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Vaibhav Sooryavanshi Statement: प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद क्या बोले वैभव सूर्यवंशी? विरोधियों की उड़ाई धज्जियां

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श्रीलंका ए को फाइनल में हराने के बाद प्लेयर ऑफ द मैच बने वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि उन्होंने पहले 10 ओवरों का फायदा उठाने का प्लान बनाया था, जो पूरी तरह सफल रहा। इसके अलावा उन्होंने अपने आलोचकों को भी जवाब दिया है।

नई दिल्ली: श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई-सीरीज के खिताबी मुकाबले में सिर्फ 29 गेंदों पर 94 रनों की आतिशी पारी खेलने वाले 15 साल के भारतीय ओपनर वैभव सूर्यवंशी को उनके ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। महज 11 गेंदों पर लिस्ट-ए इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक ठोकने वाले इस खूंखार बाएं हाथ के बल्लेबाज ने मैच के बाद अपनी रणनीति का खुलासा किया और उन आलोचकों को हंसते हुए जवाब दिया जो उनकी 50-ओवर फॉर्मेट की काबिलियत पर शक कर रहे थे।

दबाव नहीं था, बस कोच के साथ बनाए प्लान को लागू किया

मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में जब वैभव से पूछा गया कि क्या सीनियर टीम के आयरलैंड दौरे पर चयन के बाद उन पर प्रदर्शन का अतिरिक्त दबाव था, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मुझ पर कोई दबाव नहीं था। मैं बस उन योजनाओं को मैदान पर लागू करने की कोशिश कर रहा था, जो पिछले कुछ मैचों में काम नहीं कर रही थीं। मैंने इसके लिए अपने कोचों से बात की थी और नेट प्रैक्टिस में इस पर काफी काम किया था। आज मैदान पर वो रणनीति पूरी तरह सफल रही और परिणाम सबके सामने आ गया।’ वैभव ने अपनी पारी की शुरुआत को लेकर कहा, ‘मैंने बहुत ज्यादा नहीं सोचा था। मैं बस शुरुआत के पहले 10 ओवरों का पूरा फायदा उठाना चाहता था और जो सोचकर आया था, उसे डिलीवर करना था।’

वैभव के चक्रव्यूह में फंसा श्रीलंका

दांबुला के मैदान पर श्रीलंकाई गेंदबाज मैच के पहले 1 घंटे के भीतर ही पूरी तरह बैकफुट पर आ गए थे और इसका श्रेय वैभव सूर्यवंशी की उस निर्दयी बल्लेबाजी को जाता है, जिसमें उन्होंने 10 चौके और 8 गगनचुंबी छक्के जड़े। वैभव की इस ड्रीम शुरुआत के बाद भारतीय बैटिंग यूनिट ने ट्राई-सीरीज का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। वैभव के अलावा प्रियांश आर्य, ऋतुराज गायकवाड़, कप्तान तिलक वर्मा, कुमार कुशाग्र और अनुकूल रॉय ने भी बल्ले से उपयोगी योगदान दिया, जिसकी बदौलत भारत ने 377 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। इतने बड़े स्कोर के बाद भारतीय गेंदबाजों के पास खुलकर गेंदबाजी करने का पूरा मौका था और उन्होंने बेहद आसानी से श्रीलंका को ऑलआउट कर भारत की झोली में ट्रॉफी डाल दी।

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