October 30, 2026

एनएमडीसी की बालिका शिक्षा योजना के तहत इस वर्ष 290 आदिवासी छात्राओं का चयन

NMDC Balika Shiksha Yojana1

नर्सिंग के साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी की शिक्षा तक बढ़ा योजना का दायरा, अब तक 783 छात्राओं को मिला लाभ

दंतेवाड़ा: एनएमडीसी लिमिटेड ने अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल बालिका शिक्षा योजना के तहत इस वर्ष 2026 में 290 आदिवासी छात्राओं को शामिल किया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना का दायरा नर्सिंग शिक्षा से आगे बढ़ाते हुए मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र तक विस्तारित किया है।

बीएससी नर्सिंग, जीएनएम और मेडिकल टेक्नोलॉजी में 290 छात्राओं को प्रवेश

इस वर्ष के नए बैच में विभिन्न संस्थानों में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए 110 छात्राओं, जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम) कार्यक्रम के लिए 90 छात्राओं और आंध्र प्रदेश के चित्तूर स्थित अपोलो यूनिवर्सिटी में मेडिकल टेक्नोलॉजी के छह अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए 90 छात्राओं को शामिल किया गया है।

वर्ष 2011-12 में शुरू की गई यह योजना छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की आदिवासी छात्राओं को व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती है। शुरुआत में 25 छात्राओं के साथ शुरू हुई इस योजना का पिछले वर्षों में विस्तार हुआ है। कंपनी के अनुसार, अब तक इस कार्यक्रम के तहत 783 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है, जिस पर 30.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

प्रतिष्ठित संस्थानों में मिल रही व्यावसायिक शिक्षा

नर्सिंग कार्यक्रम के तहत छात्राओं को हैदराबाद स्थित अपोलो स्कूल ऑफ नर्सिंग, चित्तूर स्थित अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग, चेन्नई स्थित एसआरएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हैदराबाद स्थित केआईएमएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग और यशोदा कॉलेज ऑफ नर्सिंग सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा के लिए भेजा जाता है।

इस योजना के तहत छात्राओं की शिक्षा से संबंधित सभी खर्चों का वहन किया जाता है। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास, अध्ययन सामग्री, यूनिफॉर्म और परीक्षा शुल्क शामिल हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

बस्तर संभाग के छह जिलों की छात्राओं को प्राथमिकता

इस योजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों की अनुसूचित जनजाति की छात्राओं को लाभान्वित करना है। वर्ष 2026 के प्रवेश संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार, छात्राओं के परिवार की वार्षिक आय की अधिकतम सीमा 72,000 रुपये निर्धारित की गई थी। विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश की पात्रता अलग-अलग है। बीएससी नर्सिंग में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

लगभग 88 प्रतिशत स्नातकों को रोजगार, 80 प्रतिशत छत्तीसगढ़ में दे रहीं सेवाएं

जिन स्नातकों के रोजगार संबंधी आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से लगभग 88 प्रतिशत को रोजगार प्राप्त हुआ है। वहीं, रोजगार पाने वाली करीब 80 प्रतिशत छात्राएं छत्तीसगढ़ में ही कार्यरत हैं और राज्य के विभिन्न शासकीय एवं ग़ैर शासकीय स्वास्थ्य संथाओं में अपना योगदान दे रही हैं।

नियमित सरकारी नर्सिंग पदों पर नियुक्ति पाने वाली छात्राएं प्रतिमाह 50,000 से 60,000 रुपये तक वेतन अर्जित कर रही हैं, जबकि संविदा आधारित सरकारी नौकरियों और निजी क्षेत्र में कार्यरत छात्राओं का मासिक वेतन लगभग 20,000 से 25,000 रुपये है।

प्रत्येक एक रुपये के निवेश पर 8.55 रुपये का सामाजिक प्रतिफल

नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (आईएचडी) द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, इस योजना का सामाजिक निवेश पर प्रतिफल (सोशल रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) प्रत्येक एक रुपये के निवेश पर 8.55 रुपये आंका गया है।

एनएमडीसी लिमिटेड के निदेशक (कार्मिक) कृष्ण कुमार ठाकुर ने कहा, “नर्सिंग और मेडिकल टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों में सहायता का विस्तार करके हमारा उद्देश्य आदिवासी बेटियों के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के व्यापक अवसर तैयार करना है। उनकी सफलता से न केवल उनके परिवार सशक्त होंगे, बल्कि दूरस्थ और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। यह देखकर अत्यंत खुशी होती है कि इनमें से कई छात्राएं अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में अपने गांवों और कस्बों में लौटकर स्थानीय समुदाय की सेवा करने का विकल्प चुनती हैं।”

बालिका शिक्षा योजना के दायरे में मेडिकल टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रमों को शामिल करने से अब यह कार्यक्रम व्यावसायिक कौशल विकास और रोजगार के अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित हो गया है। वहीं, इसका नर्सिंग कार्यक्रम दूरस्थ और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने में लगातार योगदान दे रहा है।

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