संघर्ष से कक्षाओं तक: दंतेवाड़ा का आस्था गुरुकुल बच्चों को दे रहा नई जिंदगी और बेहतर भविष्य
दंतेवाड़ा। दशकों तक हिंसा और नक्सल प्रभावित परिस्थितियों का सामना कर चुके दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए जवांगा स्थित एजुकेशन सिटी का आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। यहां कक्षा 1 से 12वीं तक करीब 1,300 विद्यार्थी आवासीय व्यवस्था के साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
स्कूल में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों से आते हैं। इनमें हिंसा में अपने माता-पिता या परिजनों को खो चुके बच्चे, उग्रवाद से प्रभावित परिवारों के बच्चे तथा दंतेवाड़ा और बस्तर संभाग के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थी शामिल हैं।

संघर्ष प्रभावित बच्चों के लिए विशेष प्राथमिकता
आस्था गुरुकुल में प्रवेश के दौरान संघर्ष प्रभावित बच्चों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। स्कूल के प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही के अनुसार, पात्रता और क्षेत्र की स्थिति की पुष्टि के लिए निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाती है। इनमें पुलिस प्रमाण-पत्र तथा परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु से संबंधित एफआईआर जैसे दस्तावेज भी शामिल हैं।
हालांकि, स्कूल का उद्देश्य केवल बच्चों को शिक्षा और आवास उपलब्ध कराना नहीं है। यहां ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है, जहां संघर्ष और हिंसा से प्रभावित बच्चे मानसिक रूप से उबरते हुए शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने भविष्य के लिए नए अवसर तलाश सकें।
पढ़ाई के साथ काउंसलिंग और प्रेरक संवाद
प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही ने बताया कि हिंसा से प्रभावित बच्चों के लिए विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा आईएएस अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञों को विद्यार्थियों से संवाद और प्रेरक व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाता है, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ व्यापक दुनिया से परिचित होने का अवसर मिले।
स्कूल में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जाती है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कक्षाओं को स्मार्ट-स्क्रीन जैसी तकनीकी सुविधाओं से भी लैस किया गया है।
दूरदराज के गांवों से आने वाले उन विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था खास महत्व रखती है, जिनके गांवों में लंबे समय तक शैक्षणिक संसाधनों और आधुनिक सुविधाओं की सीमित पहुंच रही है।
एनएमडीसी के CSR से मिला आधार
आस्था गुरुकुल की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। इसके बुनियादी ढांचे के विकास में एनएमडीसी के CSR सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग आवासीय भवनों के साथ 1,000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला सभागार भी मौजूद है।
स्कूल के संचालन में भी एनएमडीसी के CSR के माध्यम से आर्थिक सहयोग जारी है। स्कूल का वार्षिक परिचालन व्यय लगभग 3.5 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस व्यवस्था में राज्य सरकार की प्रशासनिक भूमिका और एनएमडीसी के CSR सहयोग के माध्यम से एक सार्वजनिक-निजी सहभागिता का मॉडल देखने को मिलता है, जहां स्कूल का संचालन राज्य सरकार के अधीन है और बुनियादी ढांचे तथा संचालन में CSR सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शिक्षा से आगे, भविष्य की नई राह
आस्था गुरुकुल उन बच्चों के लिए महज एक आवासीय स्कूल नहीं है, जिन्होंने हिंसा और संघर्ष का दौर देखा है। यहां उन्हें नियमित दिनचर्या, औपचारिक शिक्षा, काउंसलिंग, आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद का अवसर मिलता है।
दंतेवाड़ा जैसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में इस तरह की पहल का महत्व केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। असली बदलाव तब दिखाई देता है जब यहां से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी अपने लिए नए रास्ते चुनते हैं और अपने भविष्य को उन परिस्थितियों से अलग दिशा देते हैं, जिनमें उनका बचपन बीता।
एक दशक से अधिक समय बाद आस्था गुरुकुल आज ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा, स्थिरता और अवसर का केंद्र बन चुका है, जहां उनका अतीत उनके भविष्य की सीमा नहीं, बल्कि उससे आगे बढ़ने की एक वजह बन सकता है।
