September 20, 2026

IIT बॉम्बे सुसाइड केस: प्रोफेसर पर FIR, पिता का आरोप- ‘बेटे को दी जातिसूचक गालियां, 3 महीने तक प्रताड़ित किया’

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में 22 वर्षीय छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की आत्महत्या के मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डल्ला के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। साहिल के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले 3 महीनों से जातिसूचक शब्द कहकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

डायरेक्टर और फैकल्टी पर गंभीर आरोप साहिल के पिता ने अपनी शिकायत में IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रो. शिरीष बी. केदारे, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और फैकल्टी मेंबर्स के नाम भी दर्ज कराए हैं। उनका आरोप है कि निदेशक की शह पर उनके बेटे का उत्पीड़न किया गया। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।

घटनाक्रम और संस्थान का पक्ष एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र साहिल का शव 18 सितंबर की शाम हॉस्टल नंबर-4 के कमरे से बरामद हुआ। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

  • संस्थान का दावा: IIT बॉम्बे प्रशासन के अनुसार, घटना वाले दिन साहिल परीक्षा में मोबाइल का इस्तेमाल करते और चैटजीपीटी (ChatGPT) की मदद से सवालों के जवाब ढूंढते पकड़ा गया था।

  • काउंसिलिंग की बात: संस्थान ने सफाई दी कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी, बल्कि विभागाध्यक्ष और इंस्ट्रक्टर ने उससे बात कर यह आश्वासन दिया था कि इसका उसके करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शाम करीब 4 बजे हॉस्टल लौटने के बाद देर रात यह हादसा सामने आया।

मामले से जुड़े मुख्य आंकड़े और बिंदु:

  • आईआईटी में आत्महत्या का ट्रेंड: यह पिछले 7 महीनों में IIT बॉम्बे में आत्महत्या का तीसरा मामला है। वर्ष 2026 में सितंबर तक देश के विभिन्न IIT संस्थानों में कुल 9 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं।

  • 20 साल का आंकड़ा: ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में 160 IIT छात्रों ने जान गंवाई है, जिनमें से 43% मामले पिछले 5 सालों में दर्ज किए गए। 2025 में सबसे अधिक 16 आत्महत्याएं हुई थीं।

  • अकादमिक दबाव मुख्य वजह: सर्वे के मुताबिक, 61% छात्र अकादमिक तनाव (Academic Pressure) को सुसाइड का मुख्य कारण मानते हैं। अधिकांश मामले परीक्षाओं के समय सामने आते हैं।

  • छात्रों का प्रदर्शन व परीक्षाएं स्थगित: घटना के बाद 400 से अधिक छात्रों ने परिसर में उग्र प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन ने जारी मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को टाल दिया है।

  • काउंसलर्स की कमी: शिक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देश (1,000 छात्रों पर 1 काउंसलर) के बावजूद, IIT खड़गपुर (1500 पर 1), दिल्ली (1214 पर 1) और कानपुर (1058 पर 1) जैसे संस्थानों में छात्र-काउंसलर अनुपात काफी कम है।

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